Oct 24, 2013

असुरक्षित यौन संबंधों से बचें

असुरक्षित यौन संबंधों के चलते कई बीमारियां फैल रही हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है जानकारी का अभाव। अधिकतर लोग सावधानियों के प्रति जागरुक नहीं होते। और इसी वजह से कई तरह की परेशानियों में घिर जाते हैं। असुरक्षित यौन संबंधों को लेकर लोगों में कई प्रकार की दुविधा होती है। सही स्रोतों से जानकारी के अभावों में युवा अक्सर इसे लेकर अनिश्चितता में रहते हैं। वह यही सोचते हैं कि यौन संबंधों का मतलब है सेक्स के दौरान सावधानियां बरतना। लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि असुरक्षित यौन संबंधों का अर्थ है यौन संचारित रोगों को जानना, संक्रमण की संभावनाओं इत्यादि के बारे में जागरूक होना। आइए जानें असुरक्षित यौन संबंध आखिर है क्या। असुरक्षित यौन संबंधों का अर्थ है, सेक्स के दौरान सावधानियां न बरतना। इन सावधानियों में जरूरी है कि सेक्स जोर-जबरदस्ती से न किया जाए। माहवारी के दौरान सेक्स करने से संक्रमण की संभावना बढ जाती है। एक से ज्यादा साथी फिर चाहे वह महिला हो या पुरूष के साथ संबंध बनाने से संक्रमण हो सकता है। असुरक्षित यौन संबंधों के दौरान यौन संचारित रोगों के होने का खतरा बना रहता है। बहुत अधिक कंट्रासेप्टिक पिल्स का सेवन, पहली बार सेक्स के दौरान कंडोम का सेवन न करना असुरक्षित यौन संबंधों के अंतगर्त आता है। प्रोफेशनल सेक्स वर्कर से संपर्क बनाने से भी संक्रमण की संभावना रहती है। [इसे भी पढ़ें- एड्स से संबंधी भ्रम और तथ्य] सामूहिक रूप से सेक्स करना यानी एक ग्रुप में आपस में एक-दूसरे के साथ सेक्स करना भी असुरक्षित यौन संबंधों के अंतर्गत शामिल है। वाइफ स्वैपिंग यानी एक दूसरे के पार्टनर को एक रात के लिए बदलने से भी असुरक्षित यौन संबंधों का खतरा रहता है। पुरूष या महिला में से किसी को यौन संबंधी इंफेक्शेन होने से भी संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। ओरल सेक्स से भी इंफेक्शंन होने का खतरा लगातार बरकरार रहता है। इसीलिए ओरल सेक्स में साफ-सफाई का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। सेक्स के दौरान, सेक्स से पहले खासतौर पर सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं। असुरक्षित यौन संबंध के कारण होने वाली बीमारियों की सूची लंबी है, लेकिन थोड़े संयम और सावधानी अपनाकर इनसे बचा जा सकता है।

May 10, 2013

महिलाओं में सामान्य सेक्स समस्या

Oct 21, 2012

आप शरमाते हैं या बुरा समझते हैं?

प्रिय दोस्तों मैं आप से एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ---
मैं जनता हूँ इस प्रश्न को पढ़कर आप मुझे भला बुरा अवश्य बोलोगे लेकिन इस लेख को पढना अवश्य। तो यह रहा आप से पूछा जाने वाला प्रश्न---

आप में से कितने लोगो को "सेक्स" पसंद नहीं है?

जहाँ तक मेरा विचार है- ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं जिसे सेक्स पसंद न हो। सेक्स हर पुरुष और स्त्री को पसंद है, थोडा नहीं खूब। और सभी यह भी जानते हैं कि यह हमारी लाइफ का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है, तो फिर सेक्स पर डिस्कशन या चर्चा  करने में लोग इतना कतराते क्यों हैं?
सोचने वाली बात है न ? अगर कोई सेक्स पर  बातें करता है तो उसे गलत क्यों कहा जाता है? उसे नीचा दिखाने की कोशिश क्यों की जाती है? उसे भला-बुरा क्यों बोला जाता है?

मैं बताता हूँ आपको इसका कारण--
हमारा देश एक रूडिवादी, अन्धविश्वासी देश है, जहाँ सेक्स को एक घिनोना काम माना जाता है। इसीलिए सेक्स शिक्षा हमारे देश में कहीं भी किसी भी पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है। मैं जब 10 वीं छात्र था तब साइंस के जीव विज्ञान नामक विषय के अंतर्गत एक अध्याय ऐसा था जिसमे Human Reproduction & Human Organs की कुछ प्रारंभिक जानकारी दी गयी थी तो, अध्यापक ने वह अध्याय ही छुडवा दिया था। इससे साफ जाहिर होता है कि आज भी सेक्स पर बात करने में लोग शरमाते हैं। जब अध्यापक तक शरमाते हैं, तो आम आदमी की क्या क्या बात की जाये?
अब यह तो स्पष्ट हो चुका है कि हम लोग सेक्स को बुरा नहीं मानते बल्कि सेक्स के  बारे में खुलेपन से बात करने में शरमाते हैं। लेकिन बुरा इसलिए बोलते हैं कि कही सामने वाला हमारी आलोचना न करने लग जाये और हमें गलत न ठहरा दे, क्योंकि हम खुद सेक्स पर डिस्कस करने वाले को उसी  नजर से देखते हैं, भले ही दिल से सुनना अच्छा लगता है। हम उसका साथ तो  हैं जो आलोचना कर रहा है, लेकिन उसका नहीं आपको सेक्स की जानकारी और   वाली समस्याओं से अवगत करा रहा है, क्योंकि हम एक भेड़ चाल के शिकार हैं। जिस राह पर सब जा रहे हैं  उसी रास्ते पर मैं जाऊंगा चाहे रास्ता सही है अथवा नहीं, इससे मुझे कुछ लेना देना नहीं भले ही मैं दलदल में जाकर क्यों न फस जाऊ।
यही वजह है - आज हम सेक्स समस्याओं के शिकार बहुत जल्दी होते हैं। सही जानकारी न होने की वजह से हमें जिसने जैसे बहका दिया और हम बहक गये, भले ही हमें कोई सेक्स समस्या नहीं है। एक MBBS या MD या BAMS यह कहता है कि स्वप्नदोष अथवा शीघ्रपतन जैसी  छोटी-छोटीबातें कोई बड़ी सेक्स समस्या नहीं हैं बल्कि आम समस्याएं , तो विश्वास नहीं होगा परन्तु जब कोई झोला छाप कुछ भी बोल देगा तो बहुत जल्दी विश्वास हो जायेगा। क्या सबूत है कि झोला छाप ने बोला वह सही है? एक डिग्री होल्डर डॉक्टर जो सारा ज्ञान अर्जित करके बैठा है वह गलत है लेकिन 5 वीं फेल झोला छाप सही है। ये अज्ञानता, रुदिवादिता या अन्धविश्वास नहीं तो क्या है?

अब बताईये हमे सेक्स नॉलेज की जरुरत है या नहीं? मैं सही हूँ या गलत? कमेंट्स जरुर करें....